भारत में निजता कानून को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू
भारत में एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, क्योंकि पारदर्शिता कार्यकर्ता और पत्रकार सरकार के नए ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन’ (डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण) फ्रेमवर्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कई याचिकाओं पर सुनवाई होने वाली है, जिनका मुख्य फोकस उन संशोधनों पर है जो ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) कानून के तहत “व्यक्तिगत जानकारी” तक पहुँच को सीमित करते हैं।

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आलोचकों का तर्क है कि ये बदलाव पारदर्शिता को काफी हद तक कमजोर कर सकते हैं और पत्रकारों तथा नागरिकों की, अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की क्षमता को सीमित कर सकते हैं। मीडिया संगठनों ने चिंता जताई है कि यह कानून खोजी पत्रकारिता पर एक ‘चिलिंग इफ़ेक्ट’ (भय का माहौल) पैदा कर सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि यह उन संस्थाओं पर भारी जुर्माना लगाता है जो इसका पालन करने में विफल रहती हैं।
हालाँकि, सरकार का कहना है कि इस कानून को निजता के अधिकारों और पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और सरकार इस बात पर ज़ोर देती है कि सुरक्षा उपाय अभी भी मौजूद हैं।
मुख्य बिंदु:
- भारत के नए डेटा संरक्षण कानून के खिलाफ कानूनी चुनौती दायर
- RTI के पारदर्शिता प्रावधानों के कमजोर होने को लेकर चिंताएँ
- पत्रकारों ने खोजी रिपोर्टिंग पर पड़ने वाले प्रभाव की चेतावनी दी
- सरकार ने इस कानून का बचाव करते हुए इसे निजता-केंद्रित सुधार बताया
- सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से डेटा गवर्नेंस का भविष्य तय होने की उम्मीद
