पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अगली सूचना तक बंद करने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत समेत कई देशों में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक जहाज पर कार्रवाई के बाद जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया। ईरान का कहना है कि संबंधित जहाज तय मार्ग का पालन नहीं कर रहा था। इसके बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए होर्मुज़ से जहाजों की आवाजाही रोकने की घोषणा की। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों का कहना है कि दक्षिणी मार्ग से सीमित जहाजों की आवाजाही अभी भी जारी है।
इधर अमेरिका ने इस घटनाक्रम के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का तीसरा चरण शुरू करने की जानकारी दी है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।
तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल-बुसैदी ने मस्कट में बैठक कर क्षेत्रीय हालात, समुद्री सुरक्षा और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने के उपायों पर भी विचार किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ सकता है।

